राम की शक्ति पूजा, समीक्षक डाँ. बलदेव
राम की शक्ति पूजा *************** डाँ. बलदेव ------------- (1973) ऐसा नहीं है कि राम की शक्ति पूजा के आकार - प्रकार की रचनाएँ उस युग में नहीं लिखी गईं , लिखी गईं , अकेले मैथिलीशरण गुप्त ने इस प्रकार की कम - से - कम दस लम्बी रचनाएँ लिखी है , किन्तु उनमें वर्णन और किसी वृत्ति की प्रधानता है । इन रचनाओं के बीच राम की शक्ति पूजा जैसी प्रौढ़ आत्मपरक रचना आई , तो विभ्रम होना स्वाभाविक है । किसी ने इसे महाकाव्य कहा तो किसी ने खण्डकाव्य और किसी ने वीर गीत या लम्बी कविता कहा । जानकी वल्लभ शास्त्री के अनुसार ' राम की शक्ति पूजा ' के समान स्वरूप आकार - प्रकार का परम प्रौढ़ प्रबन्ध काव्य विश्व की किसी भाषा में नहीं लिखा गया है । निराला के लिए भी यह नया प्रयोग था । उनके शब्दों में , “ इसका विषय तो पुराना है पर अदायगी और अनुबन्ध एकदम नया है । " “ महाकाव्य में जहाँ जीवन की सम्पूर्णता पर ध्यान होता है , वहाँ यह जीवन क...