फूल नागफनी का (कहानी) बसन्त राघव
कहानी:- फूल नागफनी का बसन्त राघव मुझे अपनी बेखुदी पर बड़ी हैरानी होती है । शहर में और भी कई कपड़ों की दुकानें हैं, लेकिन ताज्जुब है मैं यही क्यों चला आया , जबकि मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता था। यंत्रवत्.... - जिस कार ने मुझे इस शानदार दुकान के आगे ला खड़ा किया उसका नाम है क्रेटा cg13hP 00113 सेठ जी ने तपाक से मेरा स्वागत किया। उसकी मुख मुद्रा प्रश्नवाचक की तरह हो गई थी ।मैंने कार, सड़क किनारे लगा दी,और सीना ताने , सीढ़ियां चढ़ने लगता हूँ प्रभावोत्पादक अंदाज में । मैंने सरसरी निगाह से मुआयना किया - ग्राहकों को सम्मोहित करने वाली सज्जा रंग-बिरंगी साड़ियों का अंबार और कीमती कपड़ों का उपवन पूरी रंगत बदल गई है दुकान की। सब कुछ बदल गया है नौकर बदल गए हैं स्वयं सेठ जी बदल गए हैं और मैं भी तो कितना बदल गया हूं परिवर्तन ही जीवन है । समय सब कुछ बदल कर रख देता है पुराने घाव भर जाते हैं नए घाव उभर आते हैं । "गौंटिया जी तशरीफ रखिये। हमारे अहोभाग्य इतने लंबे अरसे बाद आपने रुख रौशन किया"। विस्फारित नजरों से देखते हुए सेठ जी ने कहा, फिर अपने एक कर्मचारी की ओर मुखातिब होकर...