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Showing posts from November, 2021

बचपन कहीं पीछे छूट गया (कविता)

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बचपन कहीं पीछे छूट गया                 *********************          कंकरीट का जंगल शायद रास आ आया          कागज का गुलशन और भी पास आ गया          कमल तलैया, अमरैया स्वप्न हुए          मेरे गांव में बसने शहर आ गया         बचपन के सभी साथी लगते हैं पराए         कोई नहीं पूछता अब क्या हाल बताएं         चल देते हैं करीब से  जैसे जानते नहीं         छुटपन की जिद्दी यादों को कैसे समझाएं         बचपन बहुत बहुत पीछे कहीं छूट गया         सपनों वाला इन्द्रधनुष भी, लो टूट गया         उसकी भोली सावली सूरत भूला...

कवि और उसका चरित्र:-पं.मुकुटधर पांडेय.

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कवि और उसका चरित्र  ******************* पं.मुकुटधर पांडेय       कवि शब्द बहुत महत्व का है । कवि का आसन बहुत ऊंचा है । राज राजेश्वरों की भी पहुंच वहाँ तक नहीं । इसका कारण यह है कि कवि ईश्वरीय विभूति संपन्न होते हैं । इसीलिए लोग उन्हें पूज्य दृष्टि से देखते हैं । और उनकी रचनाएँ संसार की स्थाई संपत्ति समझी जाती हैं । इन रचनाओं में सर्वत्र प्रतिभा की प्रभावशालिनी रश्मियों का समावेश रहता है । इस कारण वे मनुष्य की हृदय कलिका को खिलाकर उसके अंतर प्रदेश को प्रकाशित करने की शक्ति रखती है ।        अच्छा , तो कवियों के व्यक्तिगत चरित्र कैसे होते हैं ? क्या वे सदैव ही अनुकरण योग्य होते हैं ? क्या साधारण लोग उनका अनुकरण करके लाभ ही उठा सकते हैं ? आजकल शिक्षित लोगों में विशेषकर उन नवयुवकों में जिन्हें कविता से प्रेम है और जो कुछ तुकबंदी करने का यत्न किया करते हैं , कवियों के चरित के अनुकरण की प्रवृत्ति अधिक देखी जाती है । कवियों का महत्व देखते यदि लोगों में उनकी नकल करने का उत्साह उत्पन्न हो तो कोई आश्चर्य नहीं । यदि वे नीर क्षीर विवेक का अनुसरण करत...

पं.लोचन प्रसाद पांडेय लेख डाँ. बलदेव

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18 नवम्बर साहित्य वाचस्पति पं. लोचन प्रसाद पांडेय जी की पुण्यतिथ पर विशेष आलेख:- डाँ. बलदेव काव्य यात्रा *********  खड़ी बोली के विकास में जिन साहित्य मनीषियों ने अपना सर्वस्व अर्पित किया था , उनके बीच साहित्य वाचस्पति पं . लोचनप्रसाद पांडेय का नाम अत्यंत श्रद्धापूर्वक लिया जाता है । आचार्य नंददुलारे वाजपेयी ने म.प्र . की काव्य प्रवृत्तियां शीर्षक लेख में उनकी महत्ता इन शब्दों में व्यक्त की है- श्री लोचन प्रसाद पाण्डेय और उनके अनुज श्री मुकुटधर पाण्डेय हिन्दी काव्य में उसी प्रकार समादृत हैं , जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में मैथिलीशरण गुप्त और उनके छोटे भाई सियारामशरण गुप्त ' । आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपने हिन्दी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काल की नई धारा के प्रथम उत्थान में भारतेन्दु , प्रतापनारायण मिश्र , प्रेमधन , ठा . जगमोहन सिंह और अम्बिका प्रसाद व्यास को प्रमुख कवियों के रूप में स्वीकार किया है । नई धारा के द्वितीय उत्थान के कवियों में उन्होंने श्रीधर पाठक , हरिऔध पं . महावीरप्रसाद द्विवेदी , मैथिलीशरण गुप्त , पं . रामचरित उपाध्याय , गिरधर शर्मा नवरत्न और लोचनप्रसाद पाण्डेय की ...