बचपन कहीं पीछे छूट गया (कविता)
बचपन कहीं पीछे छूट गया ********************* कंकरीट का जंगल शायद रास आ आया कागज का गुलशन और भी पास आ गया कमल तलैया, अमरैया स्वप्न हुए मेरे गांव में बसने शहर आ गया बचपन के सभी साथी लगते हैं पराए कोई नहीं पूछता अब क्या हाल बताएं चल देते हैं करीब से जैसे जानते नहीं छुटपन की जिद्दी यादों को कैसे समझाएं बचपन बहुत बहुत पीछे कहीं छूट गया सपनों वाला इन्द्रधनुष भी, लो टूट गया उसकी भोली सावली सूरत भूला...