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Showing posts from April, 2022

(कहानी) पंख वाले क्षण:-बसन्त राघव

  (कहानी) पंख वाले क्षण ----------------- बसन्त राघव एक बार फिर मैं उपेक्षित हुआ था  जब प्रसंग वश उसके अभिनय- कला की तारीफ की- तब वह बिलकुल चुप थी। निर्लिप्त - निर्विकार ,जैसे महान योगिनी हो। मैंने हठात् उसकी तरफ देखा था। संस्कृत के प्रोफेसर मि. सिन्हा ने शायद मेरी मनोदशा भांप ली थी। उन्होंने चर्चा का तारतम्य मिलाते हुए कहा - " हाँ , आपने बिलकुल ठीक कहा। उर्वशी की भूमिका में इन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया था। बहुत प्राणवान था इनका अभिनय। नृत्य भंगिमाओं और मुद्राओं के माध्यम से इन्होंने जिन गहन अनुभावों की व्यंजना की वह श्लाघनीय है!...."         इस दीर्घ एवं निर्ब्याज स्तुति से उसके अधरों में सलज्ज मुस्कान पिघलने लगी थी। उसका मुख सुर्ख हो गया था। परन्तु वह पूर्ववत सिर झुकाए हुए बैठी थी। मुझे रश्क हुआ। बगल में बैठे शंशाक शेखर तिवारी ने कोहनी से मुझे धकियाया। अधेड़ प्रोफेसर का व्याख्यान कालीदास के मेघदूत से हटकर उस घमण्डी लड़की पर केन्द्रित हो गया था।        मिस संध्या गुप्ता, दुर्गा कला एवं विज्ञान महाविद्यालय...

(पुस्तक समीक्षा) मनुष्यता को हर हाल में बचाए रखने की मुहिम:- बसन्त राघव

मनुष्यता को हर हाल में बचाए रखने की मुहिम ------------------------------------------------ रमेश शर्मा के अब तक तीन कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं | "उस घर की आँखों से" उनका तीसरा कहानी संग्रह है। इसमें छोटी-बड़ी करीबन अठारह कहानियां संग्रहित हैं। अधिकांश कहानियों का रचना समय 2020-2021 है। कहानियों का वातावरण देश काल से उपजी वर्तमान समय की बिषम परिस्थितियों से नाभिनाल बद्ध है। निर्मम होता समय,निर्मम होती मनुष्यता, निर्मम होती राजनीति के बीच कोरोना काल से उपजी पीड़ा का मार्मिक चित्रण ज्यादातर कहानियों में हुआ है। मर्मस्पर्शी चित्रों से सराबोर संग्रह की कहानियां हमें सोचने को मजबूर करती हैं | कहना न होगा कि मानवीय मूल्यों के इस ह्रास का कारण तलाशने और  हमारे अन्दर मर रही मनुष्यता को एक बार फिर से जगाने की कहानीकार की विनम्र कोशिश इस संग्रह के माध्यम से हम तक पहुँचती है।  इससे पूर्व उनका पहला कहानी संग्रह "मुक्ति" और दूसरा कहानी संग्रह " एक मरती हुई आवाज" भी काफी चर्चित रहे हैं एवं पाठकों द्वारा सराहे गये हैं ।  उनके इस तीसरे कहानी संग्रह  का शीर्षक " उस...