छत्तीसगढ़ के जस गवैया, डॉ. बलदेव भइया:-परदेशीराम वर्मा
छत्तीसगढ़ के जस गवैया, डॉ. बलदेव भइया
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परदेशीराम वर्मा
सुरता म
डॉ. बलदेव ह लिखे हे - रमायन अउ महाभारत म जउन महाकान्तार अउ दंडकारन्य के बरनन हे वोहा हमर इही छत्तीसगढ़ भू-भाग के आय। कोसली नाव के गांव म भगवान राम के महतारी कौसल्या के जनम होय रिहिस, ये बात के संकेत रमायन, महाभारत, कौटिल्य के अर्थसास्त नीति अउ पानिनी बियाकरन म मिलथे। 17वीं सदी म ये भू-भाग के नाव छत्तीसगढ़ होही । 'छत्तीसगढ़़ी इहां के मनखे के मातृभासाएंÓ, सोध के बिसेस काम करइया बलदेवजी ह एकठन बड़का किताब दे के गेे हे। छत्तीसगढ़़ी कविता के सौ साल ये किताब म छत्तीसगढ़ के जम्मो पो_कविमन के रचना हे। जउन ह सोध करइयामन ल रद्दा देखावत रहिथे।
छ त्तीसगढ़ के राजगीत लिखइया डॉ. नरेन्द्र देव वरमा ह 'अरपा पइरी के धारÓ गीत म महानदी, इन्द्रावती नदिया के महिमा गाए हे । सरगुजा, रइपुर, नांदगांव, दुरूग ल छत्तीसगढ़़ वंदना म सुरता करके रयगढ़ हावय सुग्घर तोर मऊर मुकुट लिखे हे। रयगढ़ ह साहित्यकारमन के पावन नगरी ए। इहें बड़े साहित्यकार डॉ. बलदेव ह साधना करिस। कविता अउ आलोचना के छेत्र म डॉ. बलदेव के बहुत बड़का काम हे। जिला चांपा के नरियरा गांव म 27 मई 1942 के जन्में डॉ. बलदेव ह अब हमर बीच नइये, फेर उंकर काम के डंका आजो बाजत हे। सदा दिन बाजही।
नरियरा के किरिस्न लीला मंडली छत्तीसगढ़ म गजब नामी रिहिस। स्यामलाल चतुरवेदी ह ये मंडली म किरिस्न बनत रिहिस। डॉ. बलदेव ह छायावाद के पहली कवि मुकुटधर पांडे रायगढ़ नरेश चक्रधर सिंह अउ पं. सुन्दरलाल सरमा ऊपर बड़े काम करिस अउ नाव कमइस। मैथली सरन गुप्त ऊपर उंकर गरंथ हे।
देस के सबे नामी पतरिकामन म डॉ. बलदेव के लेख छपिस। छत्तीसगढ़ी पतरिका मयारु माटी, छत्तीसगढ़ सेवक, छत्तीसगढ़ लोकाक्षर म लगातार लिखिन। छत्तीसगढ़ के गंवइहा सिधवा मनखे संही रहन-सहन वाला लेखक डॉ. बलदेव के पूरा नाव हे डॉ. बलदेव साव। फेर बलदेवजी ह अपन जातिवाचक नाव के हिस्सा ले नइ लिखित रिहिस। इही ह वोकर समता के बिचार के परमान ए।
हिंदी में उंकर काम बहुत चरचा म अइस। 'वृक्ष में तब्दील हो गई औरतÓ कविता पुस्तक के गजब चरचा होइस। मुकुटधर पांडे के कवितामन ऊपर विस्वबोध नामक संकलन के संपादन करिन। छायावाद अउ दूसर निबंध लिखिन। कला संगीत ऊपर किताब रायगढ़ म कत्थक लिखिन। ढ़ाई आखर, भगत के सीख, धरती सबके महतारी किताब लिखिन । छायावाद अउ मुकुटधर पांडे के संग पं. लोचनपरसाद पांडे ऊपर सोध करिन। उंकर किताबमन सागर विस्वविद्यालय, पंडित रविसंकर विस्वविद्यालय के पाठ्यक्रम म चलिस।
वैस्नव संगीत महाविद्यालय रायगढ़ ह डॉ. बलदेवजी ल चक्रधर सम्मान दिस। नगर पालिक निगम रायपुर ले पं. मुकुटधर पान्डे सम्मान, छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन ले हरिठाकुर सम्मान उनला मिलिस।
साक्छरता अभियान बर किताब लिखे के कार्यसाला भेलई म होइस। ऐेमा डॉ. बलदेव ह सामिल होइस । नेसनलबुक ट्रस्ट ह कार्यसाला म लिखे किताब ल छापिस। सरलग सिक्छक के काम करत डॉ. बलदेव ह हिंदी अउ छत्तीसगढ़ीम लेखन करिस। गद्य अउ पद्य दूनों म उनला लिखे म महारात हासिल रिहिस। सबला सम्मान देवइया बलदेवजी ह खोज-खोज के अपन तीर-तखार के छत्तीसगढिय़ा लेखकमन ऊपर गजब लिखिस। गजबेच उदार सुभाव के डॉ. बलदेव ह दूसर के नानकुन गुन ल देख के वोकर बखान करब म बिलंब नइ करत रिहिन। दूसर के गुन ल देखे बर संत असन आंखी के जरूरत रहिथे। अपन गुन ह सबला पहाड़ ***** बड़े दिखते। संत सुभाव के मनखे ल दूसर के नानकुन गुन ह पहाड़ ***** दिखथे। इही बिसेसता डॉ. बलदेव म रिहिस।
डॉ. बलदेव ह लिखे हे - रमायन अउ महाभारत म जउन महाकान्तार अउ दंडकारन्य के बरनन हे वोहा हमर इही छत्तीसगढ़ भू-भाग के आय। कोसली नाव के गांव म भगवान राम के महतारी कौसल्या के जनम होय रिहिस, ये बात के संकेत रमायन, महाभारत, कौटिल्य के अर्थसास्त नीति अउ पानिनी बियाकरन म मिलथे।
17वीं सदी म ये भू-भाग के नाव छत्तीसगढ़ होही । 'छत्तीसगढ़़ी इहां के मनखे के मातृभासाएंÓ, सोध के बिसेस काम करइया बलदेवजी ह एकठन बड़का किताब दे के गेे हे। छत्तीसगढ़़ी कविता के सौ साल ये किताब म छत्तीसगढ़ के जम्मो पो_कविमन के रचना हे। जउन ह सोध करइयामन ल रद्दा देखावत रहिथे।
डॉ. बलदेव ह गीत-संगीत म बुड़े छत्तीसगढ़ के गांव के लइकामन बर लिखे हे -
करिया सलूखा म कौड़ी के गुथना।
चेलिक मन पहिने हे डौकी के गहना।
हाथे म अइना रेसम के लूर।
अनगहिन के पोलका म मैना मजूर।
बाजत हे बादर झुमरत हे गांव।
करमा के बोल उठय, थिरकते हे पांव।
झूमर अउ लहकी म घुमतर हे भुइंया।
अंखरा म माते, झुमरते हे गुइंया।
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