पुनर्पाठ:डाँ. बलदेव:सृजन और सरोकार :-लेखक-रजत कृष्ण
पुनर्पाठ डाँ. बलदेव:सृजन और सरोकार -------------------------------------- रजत कृष्ण छत्तीसगढ़ के अपनी लेखनी से पूर्वी हिंदी की छत्तीसगढ़ी भाषा और खड़ी बोली में समान रूप से लेखन सृजन करने वालों में महत्वपूर्ण नाम है डाँ. बलदेव आज की नई पीढ़ी के लिए डाँ. बलदेव भले ही कोई चमकता हुआ नाम न हो लेकिन छत्तीसगढ़ के जिन मसीजिवियो ने हिंदी जगत को अपनी लेखनी के ताप और जीवन संघर्ष के उदात्त रुप से प्रभावित किया है उनमें यह एक बड़ा नाम हैं। इधर पिछले कुछ दिनों से उनकी हिंदी और छत्तीसगढ़ी कविताओं के पठन का सुअवसर मिला और जो डूबा तो डूबता ही चला गया। "सूर्य किरण की छाँव में","वृक्ष में तब्दील हो गई औरत"' एवं "खिलना भूलकर"संग्रहों की कविताएं पढ़ते हुए जिस कवि से हमारी मुलाकात होती है वह एक ऐसा संवादी और जन सरोकार वाला कवि है जिसने जीवन संघर्ष और समाजिक सरोकार को ही अपनी कविता के केंद्र में रखा ।जिन दिनों बलदेव साव लेखनी क्षेत्र में आए वह हिंदी काव्य जगत में नई काव्य चेतना और नव्य सामाजिक सांस्कृतिक सरोकार के मूर्त होने का दौर था।उन्नीस सौ साठ-सत्तर का वह दशक आजादी...
पुस्तक मेैंने पढी,बहुत ही अच्छी है।पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय जी और उनसे संबंधित जनों का विवरण अप्रतिम है। पाण्डेय जी के जीवन के बारे में इतनी गहरी जानकारी कहीं और मिलना असंभव है। इसमें कई दुर्लभ चीजें हैं,जो हिन्दी जगत के लिए मिशाल हैं। ये हमारा सौभाग्य है, कि पं. लोचन प्रसाद जी छत्तीसगढ़ के निवासी थे।वे पं. मुकुटधर पाण्डेय जी के अग्रज, उनके मार्गदर्शक भी थे। और भी कई रोचक तथ्य पुस्तक में समाहित हैं।
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