स्त्रियां

स्त्रियां
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स्त्रियां 
प्रकट होती हैं
जीवन में 
किसी देवी की तरह
स्त्रियां 
ढल जाती हैं
सांचे में
मां ,बहन ,बेटी 
और पत्नी के
स्त्रियां लिखती  हैं
लोरियां
अपने पवित्र दुग्ध की 
स्याही से 
लिखती हैं सुवागीत 
अपने नयन - जल  से
स्त्रियां बनाती हैं घर
अपने खून - पसीने से 
स्त्रियां
करती हैं पूजा ,व्रत ,उपवास
अपनी राखी की कलाई ,
अपनी कोख के रत्न
और सिंदूर की 
दीर्घायु के लिए 
फिर भी 
मार दी जाती हैं 
गर्भ में ही
खिलने से पहले 
बच गई तो
भून दी जाती है
दहेज की आग में 
यही है 
यही है 
त्याग और सेवा की परिणति
अभिशप्त फलश्रुति ।

बसन्त राघव
पंचवटी नगर, कृषि फार्म रोड
बोईरदादर, रायगढ़, छ.ग
पिन.496001,मो.नं.8319939396

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