पिता

पिता 
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 मैं उगा 
 और 
 पनपता रहा 
 शनै: शनै:
 पिता की 
 अमृत - छांव तले
 अचानक 
 एक दिन
 तब्दील हो गये
 मेरे पिता
 एक विशालकाय
 पेड में 
 अब जितना भी
 बरसे 
 बावरा मेघ
 जितनी भी उगले
 आग 
 तमतमाता सूरज 
 मैं सुरक्षित हूं 
 पूरी तरह सुरक्षित हूं
 उस पेड की
 स्वर्गिक गोद में ।
       *
बसन्त राघव
पंचवटी नगर,बोईरदादर,कृषि फार्म रोड
रायगढ़, पिन नं. 496001
छत्तीसगढ़

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