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तुलसीदास /समीक्षक डाँ बलदेव

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तुलसीदास ********** डाँ. बलदेव ------------- (1973) तुलसीदास महाकवि निराला की सांस्कृतिक चेतना का उज्ज्वलतम इतिहास है । यह निराला जी का ऐसा जीवित स्मारक है जिसकी तुलना कामायनी से सहज ही की जा सकती है । इसमें राष्ट्रीय भावना , ज्ञान और भक्ति से सम्पन्न कवि का लोक मंगलकारी रूप का मनोहारी चित्रण है । साथ ही प्रकृति स्वरूपा नारी की शक्ति , सौंदर्य और प्रेरणा का रहस्योद्घाटन भी । तुलसीदास की प्रेरणा का स्रोत संभवतः रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कथाओ कहिनी की कथात्मक प्रलंब रचनाएँ हैं जिन्हें निराला जी बैलेड कहा करते थे । ये रचनाएँ उन्हें प्रिय ही नहीं थीं बल्कि कंठस्थ भी थीं । डॉ . रामविलास शर्मा के अनुसार , वे भी एक ऐसा वेलेड लिखना चाहते थे जो उनकी ही रचनाओं में नहीं , हिन्दी में ही नहीं बल्कि विश्व साहित्य में बेजोड़ हो ।१ ' महान साहित्य के प्रणयन के महान चरित्र और पद रचना कठोर साधना की आवश्यकता होती है । महान चरित्र वह , जो देश , जाति , धर्म और संस्कृति का दिशानायक हो । रवीन्द्रनाथ ने कालिदास और सूरदास पर लिखा था । पर वे महाकवि थे , लोकनायक नहीं । अपितु निराला ने तुलसी को चुना । डॉ . हजा...

निराला की 'राम की शक्ति पूजा' समीक्षक डाँ. बलदेव

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राम की शक्ति पूजा  *************** डाँ. बलदेव ------------- (1973) ऐसा नहीं है कि राम की शक्ति पूजा के आकार - प्रकार की रचनाएँ उस युग में नहीं लिखी गईं , लिखी गईं , अकेले मैथिलीशरण गुप्त ने इस प्रकार की कम - से - कम दस लम्बी रचनाएँ लिखी है , किन्तु उनमें वर्णन और किसी वृत्ति की प्रधानता है । इन रचनाओं के बीच राम की शक्ति पूजा जैसी प्रौढ़ आत्मपरक रचना आई , तो विभ्रम होना स्वाभाविक है । किसी ने इसे महाकाव्य कहा तो किसी ने खण्डकाव्य और किसी ने वीर गीत या लम्बी कविता कहा । जानकी वल्लभ शास्त्री के अनुसार ' राम की शक्ति पूजा ' के समान स्वरूप आकार - प्रकार का परम प्रौढ़ प्रबन्ध काव्य विश्व की किसी भाषा में नहीं लिखा गया है । निराला के लिए भी यह नया प्रयोग था । उनके शब्दों में , “ इसका विषय तो पुराना है पर अदायगी और अनुबन्ध एकदम नया है । "                               “ महाकाव्य में जहाँ जीवन की सम्पूर्णता पर ध्यान होता है , वहाँ यह जीवन का एक खंड चित्रण है , लेकिन इस घटना में ही महाकाव्य की गरिमा लाने का प्रयत्न भ...

छायावाद एवं अन्य श्रेष्ठ निबंध, पं.मुकुटधर पांडेय

https://drive.google.com/file/d/1vWmO1wyvngsAvmk1w49D_k5M_AlVAgQ9/view?usp=drivesdk

छायावाद एवं श्रेष्ठ निबंध: संपादक डाँ. बलदेव साव

छायावाद एवं अन्य श्रेष्ठ निबंध, सम्पादक डाँ. बलदेव https://drive.google.com/file/d/1vWmO1wyvngsAvmk1w49D_k5M_AlVAgQ9/view?usp=drivesdk

गोपाल सिंह नेपाली के गीतों का क्रमिक विकास

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गोपाल सिंह नेपाली के गीतों का क्रमिक विकास ************************************* डाँ. बलदेव -------------- हिंदी के रससिद्ध कवि गोपाल सिंह का जन्म 11अगस्त 1911 को बेतिया, पश्चिम चम्पारन बिहार के काली बाग दरबार, नेपाली रानी महल में जन्माष्टमी को गोरखा बटालियन राईफल्स के हवलदार मेजर रेल बहादुर के प्रथम पुत्र के रूप में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पेशावर अफगानिस्तान, देहरादून की सैनिक स्कूल (छावनियों) में हुई। फौजी पिता जब अफगानि- स्तान, जर्मन- फ्रांस की लड़ाई में थे, तभी वे माँ से सदा के लिए बिछुड़ गए। माँ का बिछोह, विमाता की उपेक्षा ने बालक नेपाली को वेदना से भर दिया, जिसकी पर्रिणति उनके गीतों में हुई। नेपाली जी की प्रारंभिक शिक्षा, राज स्कूल बेतिया में, तथा मैट्रिक की परीक्षा में उनका सेटअप नहीं हुआ, लेकिन इस क्षति की पूर्ति देहरादून और मंसूरी के प्रकृतिक परिवेश ने कर दिया। बेतिया के बीहड़ वन पर्वत घाटी निझरों के कल निनाद ने उन्हें कवि बना दिया। नेपाली जी की कारयित्री प्रतिभा ने उन्हें किशोरावस्था में ही चर्चित गीतकार बना दिया। श्यामल सलोने कद-काठी के नेपाली जी का कंठ अत्यंत मधुर और सुरीला...