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डाँ. बलदेव महत्व:- लेखक राजू पांडेय

डाँ. बलदेव महत्व ---------------------राजू पांडेय,ख्याति प्राप्त लेखक डॉ बलदेव का निधन छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत में जो रिक्त स्थान छोड़ गया है उसकी पूर्ति असंभव है। डॉ बलदेव ने शोध और अन्वेषण के जो उच्च मानक स्थापित किए थे, उन्हें स्पर्श करने की कल्पना भी कठिन है। छत्तीसगढ़ के साहित्यिक और सांस्कृतिक वैभव को सामने लाने के लिए छत्तीसगढ़ की चर्चित-अचर्चित विभूतियों के सुदूर ग्रामों में जाकर पांडुलिपियों का संग्रहण और अन्य प्रदेशों में जाकर अनेकानेक पुस्तकालयों में महीनों बिताते हुए इन मनीषियों पर दुर्लभ सामग्री का संकलन- यह सब इतना परिश्रम साध्य था कि उनके समर्पण को देखकर चमत्कृत हो जाना पड़ता है। यदि आज छायावाद के प्रवर्तक पद्मश्री पंडित मुकुटधर पाण्डेय पर प्रामाणिक शोध सामग्री वर्तमान शोध छात्रों हेतु उपलब्ध है तो इसका सम्पूर्ण श्रेय डॉ बलदेव को है। राजा चक्रधर सिंह और रायगढ़ के कथक घराने पर उनका शोध चमत्कृत कर जाता है। रायगढ़ की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए केवल एक ही रास्ता है और वह डॉ बलदेव के अन्वेषण परक लेखों से होकर गुजरता है। बतौर आलोचक डॉ बलदेव ने कितने ही युवा और उदीयम...

स्मरणांजली:डाँ. बलदेव

स्मरणांजली ---------------- तत्कालीन मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ अंचल के एक सामान्य गांव नरियरा के साव परिवार में पुत्र का जन्म हुआ वह असामान्य दिन था 27 मई 1942 बालक का नामकरण हुआ बलदेव।निश्चय ही उस दिन नरियरा के पुराने तालाब में असंख्य कमल खिले होंगे तो वहीं मंदिर के पास खड़े बूढ़े पीपल ने तालियां बजाकर स्वागत किया होगा, मुहल्ले की महिलाओं ने सोहर गाकर नवजात शिशु को आशीर्वाद दिया होगा। ग्रामीण संस्कृति, परिवेश, माटी प्रेम बालक बलदेव के मन में आजीवन रचे बसे रहे।         तत्कालीन ग्रामीण प्रथानुसार 14 साल की उम्र में ही विवाह हो गया जिसे बाल विवाह  ही कहेंगे, बालिका वधू  सत्या देवी ने आजीवन सत्य निष्ठा के साथ पति का साथ दिया सच्चे अर्थों में जीवन सहचरी बनी, बलदेव जी की शिक्षा, साहित्य रचना, शिक्षण व्यवसाय में सहधर्मिणी की भूमिका का उन्होंने सफल निर्वहन किया तभी उनकी साहित्य साधना अनवरत चलती रही। समयनुसार साव दम्पत्ति को दो पुत्र, दो पुत्रियों की प्राप्ति हुई। मैं तब जाजंगीर हाईस्कूल की छात्रा थी श्री बलदेव साव हिंदी पढ़ाते थे, डाँ. शिवमंगल सिंह ...

स्मृतिशेष:डाँ. बलदेव:-लेखक रमेश शर्मा

स्मृति शेष : डॉक्टर बलदेव ------------------------------------- डॉक्टर बलदेव एक प्रबुद्ध साहित्यकार थे । एक साहित्यकार होने की वजह भर से ही मेरा संबंध उनसे नहीं था बल्कि वे मेरे लिए एक संरक्षक की तरह भी थे । वे मेरे प्राचार्य रहे । एक अध्यापक के रूप में उनके अधीन काम करने का कुछ दिनों तक मुझे अवसर भी मिला, फिर बाद में जाकर उनके घर के निकट जब मेरा भी घर बना तो एक तरह से वे मेरे पड़ोसी भी बन गए । मैं दूसरी पीढ़ी का था इसलिए उनके साथ मेरे पिता तुल्य संबंध थे । मैं उन्हें बलदेव चाचा के नाम से पुकारता था ।  दो अलग-अलग पीढ़ी के होने के बावजूद विचारों में खुले पन की वजह से हमारे बीच मित्रवत संबंध रहे , पर यह संबंध हमेशा मर्यादा की परिधि के भीतर ही बना रहा । वे जब भी कुछ बात कहते या कुछ करते तो सचेत रहते कि अपने पुत्र तुल्य दूसरी पीढ़ी के लड़के के साथ वे बात कर रहे हैं । वे बात-बात में कहते कि तुम तो मेरे बेटे की तरह हो, तुमसे मैं क्या कहूं ।  एक लंबे समय तक मेरा उनका साथ बना रहा । इस दरमियान मैं जब अपने पुराने मकान को बेचकर नई कालोनी में शिफ्ट हो गया तो मेरे दूर चले जाने का उन्हें थो...

विश्वबोध (कविता संग्रह)पं.मुकुटधर पांडेय

पं. मुकुटधर पांडेय -----------------------                                                               डाँ. बलदेव छायावाद के प्रर्वतक पं. मुकुटधर पांडेयः  -           -----------------------------------------------    (विश्वबोध कविता संग्रह से, संपादक -डाँ०बलदेव)   प्रकाशकीय:- युग प्रवर्तक कवि पं. मुकुटधर पांडेय की श्रेष्ठ और विलुप्त प्राय रचनाओं को प्रथम बार पुस्तकाकार प्रकाशित करते हुए हमें आपार हर्ष का अनुभव हो रहा है। पांडेय जी के नाम पिछले पच्चीस-तीस वर्षों से जिज्ञासा भरे पत्र आते रहे हैं। जिनमें हिन्दी के समर्थ आलोचकों से लेकर सामान्य पाठकों तक ने उनकी रचनाओं को पढ़ने की बार बार इच्छा  प्रकट की है। ...

सेठ किरोड़ीमल:- लेखक बसन्त राघव

सेठ किरोड़ीमलः- -------------------                                                 लेखक:- बसन्त राघव वर्तमान रायगढ़ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी है, औद्योगिक नगरी के रूप में इसका तेजी से विकास हो रहा है।छत्तीसगढ़ के पूर्वी सीमान्त पर हावड़ा-बाम्बे रेल लाइन का यह जीवन्त नगर है।इसका एक दिलचस्प इतिहास है राजा चक्रधर सिंह और दानवीर किरोड़ीमल लोहारीवाला के नाम पर इसे विश्व-विख्यात ख्याति मिली हैं , रायगढ़ राज्य की स्थापना सन् 1668 के आसपास महाराष्ट्र चान्दा से विस्थापित राजा मदन सिंह ने की थी। पहले बुनगा बाद में राजा ने नवागढ़ी में "सतखंडा" की नींव डाली और राज्य को विकसित किया। बीसवीं सदी के शुरू में राजा चक्रधर सिंह ने उसे साहित्य और संगीत के लिए विख्यात किया। रायगढ़ नगर की प्रसिद्धि में एक और अमिट नाम है दानवीर सेठ किरोड़ीमल लाहरीवाले का , सच्चे अर्थों में वे आधु...

(लघुकथा) वरदान: बसन्त राघव

  (लघुकथा) वरदान --------                                 बसन्त राघव                          पंचवटी नगर, बोईरदादर, रायगढ़                                        मो.नं. 8319939396 आखिर मुख्यमंत्री दौरे से अपने निवास को लौटे,वे प्रसन्न थे। गेट पर उन्होंने एक दुबले, फटे पुराने कपड़ें में रिटायर्ड मास्टर को देखा। वह तम्बू उखाड़ कर बैनर लपेटकर जाने को तैयार हो चुका था,तभी उसके कानों में कार की आवाज सुनाई दी और वह ठिठक गया।मुख्यमंत्री ने गेट पर ही कार रुकवा दी। उन्होंने दयाद्र होकर मास्टर साहब को उसी प्रकार देखा जैसे यमराज ...